Son of Rai Saheb Soban Singh, Shri Laxman Singh was born in Burfu in Johar Valley on 24th July,1905. He belonged to a rich family. His grand father, Phannu Jangpangi was awarded with a certificate of dagger and a medal by the British Government in recognition of his cooperation with the British Administration. His father,Soban was conferred upon the title of “Rai Saheb” for his services to British administration.
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Talents who got the Padma Awards (पद्म पुरस्कार प्राप्त प्रतिभायें)
श्री लक्ष्मण सिंह जंगपाँगी, पद्म श्री
श्री लक्ष्मण सिंह जंगपाँगी का जन्म 24 जुलाई,1905 को जोहार घाटी के बर्फू नामक स्थान पर राय साहब सोबन सिंह के घर हुआ था। वह एक अमीर परिवार से थे। उनके दादा फन्नू जंगपाँगी को ब्रिटिश सरकार ने उनके ब्रिटिश सरकार से सहयोग करने के एवज में “सर्टिफिकेट ऑफ डैगर” और पदक प्रदान किया था। उनके पिता सोबन सिंह को ब्रिटिश सरकार ने उनकी सेवाओं के लिये “राय साहब” की उपाधि प्रदान की थी।
श्री लक्ष्मण सिंह जंगपाँगी ने अपना मैट्रिकुलेशन और इंटरमीडियेट अल्मोड़ा से 1926 में पूरा किया। उन्होनें बी.ए. फाइनल तक इलाहाबाद विश्विद्यालय में अपनी पढ़ाई की।
Read MoreDr. Shekhar Pathak
He is in his early fifties, his name is Shekhar Pathak, and he lives somewhere in the Himalaya — somewhere, but we do not know exactly where. For he is a gumakkad, a traveller and seeker who lives for and loves our beautiful hills — its people, its cultures, its rivers, its threatened landscape. Sometimes Shekhar Pathak is in the upper reaches of the Alakananda valley, tracing the ancient routes of the Bhotiya herders who once traded across the Himalaya with Tibet. At other times he is down in villages by the river-bed, recording the stories of women who participated in the Chipko Andolan
Read MorePadma Awards from Uttarakhand
Padma Awards, namely, Padma Vibhushan, Padma Bhushan and Padma Shri are given for exceptional and distinguished service in any field including service rendered by Government servants. The recommendations for Padma Awards are received from the State Governments/Union Territory Administrations, Central Ministries/Departments, Institutions of Excellence, etc. which are considered by an Awards Committee. On the basis of the recommendations of the Awards Committee, and after approval of the Home Minister, Prime Minister and President, the Padma Awards are announced on the eve of the Republic Day. Following persons from Uttarakhand got the Padma Award.
Read Moreखड्ग सिंह वल्दिया
1965-66 में अमेरिका के जान हापकिन्स विश्वविद्यालय के ‘पोस्ट डाक्टरल’अध्ययन और फुलब्राइट फैलो। 1969 तक लखनऊ वि.वि. में प्रवक्ता। राजस्थान वि.वि., जयपुर में रीडर। 1973-76 तक वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियॉलॉजी में वरिष्ट वैज्ञानिक अधिकारी। 1976 से 1995 तक कुमाऊँ विश्वविद्यालय में विभिन्न पदों पर रहे। 1981 में कुमाऊँ वि.वि के कुलपति तथा 1984 और 1992 में कार्यवाहक कुलपति रहे। 1995 से जवाहरलाल नेहरू सेन्टर फार एडवांस्ड साइंटिफिक रिसर्च केन्द्र बंगलौर में प्रोफेसर हैं।
Read Moreयशोधर मठपाल
तूरीनो (इटली) में 1995 में गुफाकला के विश्व सम्मेलन की अध्यक्षता, वहीं इंटरनेशनल फैडरेशन आफ रॉक आर्ट आर्गनाइजेशन द्वारा मानद डिप्लोमा। 1999 में पुर्तगाल में एशिया-प्रशान्त क्षेत्र के सत्र की सह अध्यक्षता। 2001 में मेजो दे साइन्सेज, पेरिस द्वारा आमंत्रित आचार्य। 1959 में बनारस विश्वविद्यालय द्वारा चित्रकला में प्रान्तीय प्रथम पुरस्कार स्वरूप स्वर्णपदक। 1985 में कन्हैयालाल प्राग दास स्मारक समिति द्वारा कलाश्री। 2000 में अखिल गढ़वाल सभा देहरादून व उत्तरायणी मेला समिति द्वारा अभिनन्दन। उत्तरांचल की प्रथम गणतंत्रदिवस संध्या पर मुख्यमंत्री द्वारा प्रशस्तिपत्र व 25000 रु. का पुरस्कार। प्रागैतिहासिक पुरातत्व व लोक कला संस्कृति पर 19 मौलिक पुस्तकों का सृजन। 200 से अधिक शोध प्रपत्र, कुछ कविता संग्रह भी प्रकाशित विन्ध्यांचल, केरल, आन्ध्र, कनार्टक, उत्तर प्रदेश व उत्तरांचल में 400 से अधिक गुफाओं से आदि मानव की कला का शोधन। कई सहस्र चित्रों का सृजन, देश-विदेशों में 25 एकल चित्र प्रदर्शनियाँ, 15 विश्व सम्मेलनों में भागीदारी। उत्तराखण्ड की काष्ठ कला पर विशेष कार्य।
Read Moreचण्डी प्रसाद भट्ट
सहकारिता आधारित आन्दोलन के प्रारम्भकर्ता, दशौली ग्राम स्वराज्य मण्डल के संस्थापक, ‘चिपको आन्दोलन’ के सर्वाधिक महत्वपूर्ण कार्यकर्ता, पेड़ों को बचाने के साथ वृक्षारोपण तथा पर्यावरण चेतना के आन्दोलन को फैलाने में महत्वपूर्ण योगदान। दर्जनों पुरस्कारों से सम्मानित। विभिन्न राष्ट्रीय-अन्तर्राष्ट्रीय समितियों के सदस्य। वर्तमान में राष्ट्रीय वन आयोग तथा अन्तरिक्ष विभाग की समिति के सदस्य। सैकड़ों लेख तथा अनेक पुस्तकें प्रकाशित।
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