रस्किन बॉण्ड

पिछली आधी शताब्दी से लिख रहे हैं। बच्चों के लिए भी लिखा है। कुछ रचनाओं पर फिल्में बनी हैं। लगभग 75 किताबें प्रकाशित। अनेक भाषाओं में अनुवाद। साहित्य अकादेमी पुरस्कार तथा अन्य पुरस्कारों के अलावा पद्मश्री से सम्मानित।

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आदित्य नारायण पुरोहित

वनस्पति विज्ञान तथा उच्च हिमालयी औषधि पौधों पर विशिष्ट काम। पंजाब वि.वि., चण्डीगढ़ में वनस्पति विज्ञान विभाग में शोध अधिकारी रहे। नॉर्थ ईस्ट हिल यूनिवर्सिटी, शिलांग तथा गढ़वाल वि.वि. में अध्यापन। गोविन्द बल्लभ पंत हिमालयी पर्यावरण तथा विकास संस्थान के निदेशक तथा कोसी-कटारमल स्थित परिसर के निर्माता। गढ़वाल वि.वि., श्रीनगर में हाई एल्टिट्यूड प्लांट फिजियोलॉजी रिसर्च लैबोरेट्री तथा तुंगनाथ में फील्ड स्टेशन की स्थापना। इंस्टीट्यूट आफ बायलौजी, लन्दन के निर्वाचित सदस्य हैं। गढ़वाल वि.वि. के कार्यवाहक कुलपति भी रहे। ‘इन्टरनेशनल जर्नल आफ सस्टेनेबिल फारेस्ट्री’ के सम्पादक मण्डल के सदस्य हैं। अनेक शोध पत्र तथा पुस्तकों के लेखक। कई संस्थानों के सदस्य, विशेषज्ञ सदस्य, संयोजक और अध्यक्ष हैं। आपको एफ.एन.ए. का सम्मान भी मिला है।

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ललित पाण्डे

उत्तराखण्ड सेवानिधि तथा इसके पर्यावरण शिक्षा संस्थान के माध्यम से उत्तराखण्ड में शिक्षा, पर्यावरण, महिला सशक्तीकरण एवं आंचलिक विकास के विभिन्न पक्षों पर कार्य। ग्रामीण स्वास्थ्य तथा संसाधनों का विश्लेषण भी करने का प्रयास किया। अनेक संस्थाओं को सेवानिधि के माध्यम से आर्थिक तथा तकनीकी सहयोग देने में सतत् सक्रिय। उत्तराखण्ड के पहले आधुनिक एटलस को प्रकाशित करने के साथ अनेक पुस्तकों का प्रकाशन। सम्प्रति- उत्तराखण्ड सेवा निधि पर्यावरण शिक्षा संस्थान अल्मोड़ा के निदेशक।

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कुंवर सिंह नेगी

देश की विभिन्न भाषाओं में अनेक पाठ्य पुस्तकों, धार्मिक व साहित्यिक पुस्तकों को ब्रेल लिपि में रूपांतरण व दृष्टिहीनों में निःशुल्क वितरण। दृष्टिहीनों के लिए किए गए कार्य पर विश्व उन्ननय संसद, कलकत्ता द्वारा विकलांग कल्याण में डाक्टरेट की मानद उपाधि। 1981 में पद्मश्री। 1990 में पद्म भूषण से अलंकृत।

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लीलाधर जगूड़ी

10 कविता संग्रह और एक गद्य पुस्तक प्रकाशित। 1997 में साहित्य एकेडमी पुरस्कार। भारतीय भाषा परिषद् पुरस्कार (वैस्ट बंगाल)।कविता में नई परम्परा की शुरुआत। युवाओं के नाम संदेशः अध्ययन से ही नई दृष्टि प्राप्त की जा सकती है।

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