Garhwali Poetry and Dhanga Se Sakshyatkar

Garhwali Poetry tour through Dhanga Se Sakshyatkar (A review of poetry collection of Netra Singh Aswal By Rajendra Dhashmana) Translation : Bhishma Kukreti (Dhanga Se Sakshyatkar, a poetry collection of Netra Singh Aswal in Garhwali language, is one of the mile stones in Garhwali poetic world. The author wanted to write review on this poetry collection but when he read this commentary of Rajendra Dhashmana, he felt that it is better if he translates the same in English instead of writing a fresh one. This review is an intelligent and…

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A study of Folk Songs on the basis of Music,Poetic principles

Classification of folk dance song of Uttarakhand Garhwal – 9 ["गढ़वाल के लोक नृत्य गीत" डॉ शिवानन्द नौटियाल द्वारा लिखी हुई एक महत्वपूर्ण पुस्तक है। इसी पुस्तक की समीक्षा श्री भीष्म कुकरेती जी द्वारा की गयी है। इस पुस्तक समीक्षा को एक श्रंखला के रूप में प्रकाशित कर रहे हैं। इस श्रंखला के माध्यम से आप उत्तराखंड-गढ़वाल के सांस्क़ृतिक परिदृशय से भी परिचित होंगे।- प्रबंधक] पहला भाग, दूसरा भाग, तीसरा भाग , चौथा भाग, पांचवां भाग, छ्ठा भाग, सातवां भाग, आठवां भाग Sangeet Shastriya Avam Kavya-Shashtra Adhyan (A study on…

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Dance-Songs of Professional classes in Uttarakhand

Classification of folk dance song of Uttarakhand Garhwal – 8 ["गढ़वाल के लोक नृत्य गीत" डॉ शिवानन्द नौटियाल द्वारा लिखी हुई एक महत्वपूर्ण पुस्तक है। इसी पुस्तक की समीक्षा श्री भीष्म कुकरेती जी द्वारा की गयी है। इस पुस्तक समीक्षा को एक श्रंखला के रूप में प्रकाशित कर रहे हैं। इस श्रंखला के माध्यम से आप उत्तराखंड-गढ़वाल के सांस्क़ृतिक परिदृशय से भी परिचित होंगे।- प्रबंधक] पहला भाग, दूसरा भाग, तीसरा भाग , चौथा भाग, पांचवां भाग, छ्ठा भाग, सातवां भाग Vyavsayik Jatiyon ke Lok Nritya geet (Dance-Songs of Professional classes)…

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Community/Group and Social Dance Songs of Uttarakhand

Classification of folk dance song of Uttarakhand Garhwal – 7 [“गढ़वाल के लोक नृत्य गीत” डॉ शिवानन्द नौटियाल द्वारा लिखी हुई एक महत्वपूर्ण पुस्तक है। इसी पुस्तक की समीक्षा श्री भीष्म कुकरेती जी द्वारा की गयी है। इस पुस्तक समीक्षा को एक श्रंखला के रूप में प्रकाशित कर रहे हैं। इस श्रंखला के माध्यम से आप उत्तराखंड-गढ़वाल के सांस्क़ृतिक परिदृशय से भी परिचित होंगे।- प्रबंधक] पहला भाग, दूसरा भाग, तीसरा भाग , चौथा भाग, पांचवां भाग, छ्ठा भाग B -Samuhik aur Samajik Nrityageet (Community/group and social dance-songs) There are certain…

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Community and Society based Dance-Songs of Uttarakhand

Classification of folk dance song of Uttarakhand Garhwal – 6 [“गढ़वाल के लोक नृत्य गीत” डॉ शिवानन्द नौटियाल द्वारा लिखी हुई एक महत्वपूर्ण पुस्तक है। इसी पुस्तक की समीक्षा श्री भीष्म कुकरेती जी द्वारा की गयी है। इस पुस्तक समीक्षा को एक श्रंखला के रूप में प्रकाशित कर रहे हैं। इस श्रंखला के माध्यम से आप उत्तराखंड-गढ़वाल के सांस्क़ृतिक परिदृशय से भी परिचित होंगे।- प्रबंधक] पहला भाग, दूसरा भाग, तीसरा भाग , चौथा भाग, पांचवां भाग Third Chapter: The Community/Group -Social Dance-Songs A- Community and Society based Dance -Songs Uttarakhand-Garhwal…

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घुघूती घुरूंण लगी म्यारा मैत की

उत्तराखण्ड का लोकसंगीत न्यौली और खुदैड़ जैसे विरह गीतों से भरा पड़ा है। इन गीतों का अधिकांश भाग विवाहित महिलाओं पर आधारित है जो विकट ससुराल के कष्टपूर्ण जीवन को कोसते हुए मायके के दिन याद करती हैं। पहाड़ के गांवों में महिलाओं का जीवन अत्यंत संघर्षशील और कष्टप्रद है। दिनभर खेत-खलिहान-जंगल, मवेशियों और घर-परिवार की जिम्मेदारी अपने कंधों पर संभालने वाली मेहनतकश, मजबूत नारी को सामान्यत: इतना अवकाश भी नहीं मिल पाता कि वह अपने मायके को याद कर पाये। लेकिन जैसे ही चैत (चैत्र) का महीना लगता है…

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लाइकेन

दोस्ती हो तो लाइकेन जैसी! हां दोस्तो, प्रकृति में लाइकेन अटूट दोस्ती का बेमिसाल नमूना है। इसमें दो दोस्त अटूट बंधन में बंध जाते हैं। दोस्ती का ऐसा बंधन जो जीते-जी टूट नहीं सकता। इस दोस्ती के कारण उनको पहचानना तक कठिन हो जाता है। इस दोस्ती में वे बिल्कुल नया रूप रख लेते हैं और ‘लाइकेन’ बन जाते हैं। जीवन भर एक दूसरे का साथ निभाने वाले ये दो दोस्त हैं- शैवाल यानी एल्गी और फफूंदी यानी फंजाई। ये दोनों ही पौधे हैं। फफूंदी रंगहीन होती है और बारीक…

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