गर्मियों में गेहूं कटने के बाद हम उन खेतों और आसपास की खाली जमीनों में या फिर चिनाड़ व पाल् गध्यार ले जाकर गाय-भैसें चराते थे। गर्मियों में स्कूल की छुट्टियां होने पर दिन भर गाय-भैसों के साथ रहते थे। मैं, जैंतुवा और पनुदा अपनी-अपनी गाय-भैसों के साथ जाते थे। हाथ में होता था तेज दात जिससे टहनियां वगैरह काटते थे। सुबह थान पर से खोलने के बाद सभी गाय-भैंसें अपनी मुखिया भैंस के पीछे-पीछे लाइन बना कर चल पड़ती थीं। …
Read Moreपी जाओ म्यॉर पहाड़ को ठंडो पानी
गोपाल बाबू गोस्वामी द्वारा गाया गाना “पी जाओ, पी जाओ, म्यॉर पहाड़ को ठंडो पाणी” लोगों को अपने पहाड़ की याद दिलाता है। पहाड़ का प्राकृतिक वातावरण होता ही इतना सुन्दर है कि पहाड़ लोगों की स्मृतियों में हमेशा ज़िन्दा रहता है। पहाड़ के लोग पहाड़ में शहर को खोजते हैं और एक बार शहर पहुंच जाते हैं तो वहाँ पहाड़ को। हिमालय जो देवभूमि है, देवता जहां निवास करते हैं उसी की सुन्दरता दिखाता हुआ गाना है यह। भावार्थ : आओ मेरे पहाड़ का शीतल जल पी जाओ। मेरे…
Read Moreनैनीताल समाचार : अखवार ही नहीं आन्दोलन भी
आज का जमाना समाचारों व जानकारियों के विस्फोट का जमाना है। आज हमारे पास, कहने को, समाचार व जानकारी प्राप्त करने के अनेक साधन उपलब्ध है। अब पहले की तरह नहीं है जब आप को दिन में दो तीन बार प्रसारित होने वाले सरकारी समाचारों पर निर्भर रहना पड़ता था या फिर निष्पक्ष समाचारों के बी.बी.सी. रेडियो की प्रतीक्षा करनी पड़ती थी। आज हमारे पास 24 घंटे चलने वाले वाले समाचार चैनल हैं, थोड़ी थोड़ी देर में आने वाले तोड़ू समाचार (ब्रेकिंग न्यूज) हैं। इन सब के बावजूद भी यदि…
Read Moreतेरि पिड़ा मां दुई आंसु मेरा भि
नरेन्द्र सिंह नेगी जी के गीतों में अन्तर्निहित भावों की सुन्दरता को आपने इससे पहले भी कई गीतों में इस साइट पर महसूस किया होगा। यही अन्तर्निहित भाव उनके गीतों अधिक सुन्दर व अर्थपूर्ण बनाते है। आज हम ऐसा ही भावनापूर्ण गीत आपके सामने लेकर आ रहा हैं। इस गीत में पहाड़ के अधिकांश विवाहित जोड़ों की तरह पति पहाड़ से बाहर जाकर नौकरी कर रहा है और स्त्री गांव में रहकर घर व खेतों की देखभाल कर रही है व परिवार का पालन-पोषण कर रही है। विरहरस से भरे…
Read Moreबोला भै-बन्धु तुमथें कनु उत्तराखण्ड चयेणुं च
उत्तराखण्ड राज्य प्राप्ति के लिये उत्तराखण्ड के लोगों ने लगभग 50 साल तक संघर्ष किया और एक बड़े अहिंसक आन्दोलन के फलस्वरूप अलग राज्य का निर्माण हुआ। पृथक राज्य निर्माण की मांग पीछे लोगों की यह अपेक्षाएं थी कि अपना राज्य और अपना शासन होगा तो दुश्वारियां कुछ कम होंगी और सामान्य जनता की इच्छानुसार एक आदर्श राज्य की स्थापना होगी। पृथक राज्य बनाने के उद्देश्य को लेकर लड़ रहे समाज में हर तबके की अपनी-अपनी प्राथमिकताएं और अपेक्षाएं थीं, उसी दौर में नेगी जी ने यह गाना लिखा। इस…
Read Moreजी रे जागि रे, जुगराज रे तू- जी रे
तेजी से बदलते भारतीय समाज में अन्य भारतीय परम्पराओं के साथ- साथ संयुक्त परिवार का ताना-बाना भी टूटता जा रहा है। कैरियर और प्रतिस्पर्धा के पीछे भागते-भागते आज का युवावर्ग अपने माता-पिता के रूप में किस अमूल्य निधि का तिरस्कार करता है, उसे आभास नहीं हो पाता। बड़े शहरों में ऐसे कई बुजुर्गों की कहानी सुनने को मिलती है जिनकी सन्तानें उन्हें अकेले छोड़कर या वृद्धाश्रम में धकेलकर बेरोकटोक, स्वतन्त्र जीवन जीने का रास्ता चुनते हैं और अन्तत: ऐसे बुजुर्ग या तो अपने नौकरों के हाथों मारे जाते हैं या…
Read Moreश्यूँ बाघ, देबुआ और प्यारा सेतुआ….
[पहाड़ों में बाघ और मानव एक साथ रहते आये हैं। इन बाघों को कुकुर बाघ, श्यूँ बाघ के नाम से भी जाना जाता रहा है। कभी कभी बाघ आदमखोर भी हो जाते हैं। नरेन्द्र सिंह नेगी जी ने "सुमा हे निहोणिया सुमा डांडा ना जा" गीत में भी इसी तरह की एक घटना का जिक्र किया है। देवेन्द्र मेवाड़ी जी अपने गांवों के किस्से हमें सुनाते रहे हैं। हाल ही में उनकी तुंगनाथ यात्रा का रोचक वर्णन भी काफी लोगों ने पसंद किया। आजकल वह हमें अपने गांव के श्यूँ…
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