ऐसे अनपढ़ चाहिये पहाड़ को

एक थीं गौरा देवी: एक माँ के बहाने चिपको आन्दोलन की याद – 4 [पिछ्ले भागों में आपने पढ़ा कि किस प्रकार शेखर पाठक जी अपने साथियों के साथ गौरा देवी से मिले , कैसे हुई चिपको की शुरुआत और क्या हुआ चिपको आंदोलन के बाद ,आज जानते है कि कैसे चिपको आंदोलन को कुछ लोगों ने हथिया लिया। प्रस्तुत है लेख की अंतिम किश्त। ] गौरा देवी अपने जीवन के अन्तिम वर्षों में गुर्दे और पेशाब की बीमारी से परेशान रहीं। पक्षाघात भी हुआ। पर किसी से उन्हें मदद…

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बोला भै-बन्धु तुमथें कनु उत्तराखण्ड चयेणुं च

उत्तराखण्ड राज्य प्राप्ति के लिये उत्तराखण्ड के लोगों ने लगभग 50 साल तक संघर्ष किया और एक बड़े अहिंसक आन्दोलन के फलस्वरूप अलग राज्य का निर्माण हुआ। पृथक राज्य निर्माण की मांग पीछे लोगों की यह अपेक्षाएं थी कि अपना राज्य और अपना शासन होगा तो दुश्वारियां कुछ कम होंगी और सामान्य जनता की इच्छानुसार एक आदर्श राज्य की स्थापना होगी। पृथक राज्य बनाने के उद्देश्य को लेकर लड़ रहे समाज में हर तबके की अपनी-अपनी प्राथमिकताएं और अपेक्षाएं थीं, उसी दौर में नेगी जी ने यह गाना लिखा। इस…

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जाग जाग हे उत्तराखण्डि…..जै भारत जै उत्तराखण्ड

सन 1994 में पृथक उत्तराखण्ड राज्य की मांग को लेकर पहाड़ के लोगों ने एक व्यापक अहिंसक आन्दोलन चलाया था। यह एक स्वत:स्फूर्त आन्दोलन था जिसमें समाज के हर वर्ग और आयु के लोगों ने बढ-चढ कर हिस्सा लिया। इसी दौरान लोकगायक व कवि नरेन्द्र सिंह नेगी जी ने एक कविता के रूप में इस “आह्वान गीत” को लिखा। यह गीत बाद में उत्तराखण्ड आन्दोलन के दौरान उनके एक कैसेट में रिलीज हुआ। यह गीत उत्तराखण्ड के समस्त नारी-पुरुषों को एकजुट होकर उत्तराखण्ड राज्य के हित में आवाज उठाने का…

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मथि पहाड़ु बटि, निस गंगाड़ु बटि..उत्तराखण्ड आन्दोलन मां

नरेन्द्र सिंह नेगी की कैसेट “उठा जागा उत्तराखण्ड्यूं” से लिया गया यह गाना ऐसे समय पर गाया गया जब पूरा उत्तराखण्ड पृथक राज्य प्राप्ति की मांग को लेकर उद्वेलित था। पृथक उत्तराखण्ड राज्य की मांग को लेकर आजादी से पहले से ही उत्तर प्रदेश के गढवाल-कुमाऊं के पहाड़ी इलाके के लोग एकजुट होकर प्रयास करने लगे थे। लेकिन 1994 में उत्तराखण्ड क्रान्ति दल व छात्र संगठनों द्वारा शुरु किया गया पृथक उत्तराखंड राज्य के लिये आन्दोलन इस दिशा में एक महत्वपूर्ण आन्दोलन था। उत्तराखण्ड के लोगों के द्वारा अहिंसात्मक व…

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